Supertrend Indicator हिंदी में
अपडेट 11 अक्टूबर 2026
Supertrend भारत के retail traders में बहुत लोकप्रिय indicator है। Chart पर यह price के ऊपर या नीचे एक लाइन की तरह दिखता है, जो कभी हरी और कभी लाल होती है। यह एक trend-following indicator है, यानी यह बताने की कोशिश करता है कि अब तक price किस दिशा में चल रहा है। इस पेज में आप समझेंगे कि Supertrend कैसे बनता है, इसकी settings का क्या मतलब है और इसकी सीमाएँ क्या हैं।
Supertrend किस चीज़ से बनता है
Supertrend दो चीज़ों पर टिका है:
- ATR (Average True Range): पिछले कुछ candles में price औसतन कितना हिला। यह volatility का माप है। ATR भी Wilder का बनाया indicator है।
- Multiplier: ATR को कितने गुना करके price से दूरी रखनी है।
सबसे प्रचलित setting है ATR period 10 और multiplier 3। यह कोई "best setting" नहीं है, बस ज़्यादातर charting platforms पर default यही होता है।
फ़ॉर्मूला
- Mid price = (High + Low) ÷ 2
- Basic upper band = Mid price + (Multiplier × ATR)
- Basic lower band = Mid price − (Multiplier × ATR)
जब trend ऊपर का माना जाता है, Supertrend लाइन lower band पर होती है (price के नीचे, आम तौर पर हरी)। जब trend नीचे का माना जाता है, लाइन upper band पर होती है (price के ऊपर, आम तौर पर लाल)। Uptrend में lower band सिर्फ़ ऊपर खिसक सकती है, नीचे नहीं; downtrend में upper band सिर्फ़ नीचे खिसक सकती है। जब close लाइन को पार कर जाता है, तो दिशा पलट जाती है और लाइन दूसरी तरफ़ चली जाती है।
उदाहरण: Stock ABC पर Supertrend
मान लीजिए Stock ABC की एक daily candle है: High ₹510, Low ₹490। पिछले 10 दिनों का ATR ₹8 है और multiplier 3 है।
- Mid price = (510 + 490) ÷ 2 = ₹500
- Multiplier × ATR = 3 × 8 = ₹24
- Upper band = 500 + 24 = ₹524
- Lower band = 500 − 24 = ₹476
मान लीजिए अभी uptrend चल रहा है, तो Supertrend लाइन ₹476 पर है। अगले दिन High ₹520, Low ₹500 और ATR फिर से ₹8 रहा। नया mid = (520 + 500) ÷ 2 = ₹510, नया lower band = 510 − 24 = ₹486। यह पिछले ₹476 से ऊपर है, इसलिए लाइन ऊपर खिसककर ₹486 पर आ जाती है। अगर किसी दिन close ₹486 से नीचे हो जाए, तो Supertrend downtrend में पलट जाएगा और लाइन price के ऊपर, उस दिन के upper band पर चली जाएगी।
Multiplier और ATR period बदलने का असर
- छोटा multiplier (जैसे 2): लाइन price के ज़्यादा पास रहती है, इसलिए दिशा जल्दी-जल्दी पलटती है। ज़्यादा signals, लेकिन ज़्यादा झूठे पलटाव भी।
- बड़ा multiplier (जैसे 4): लाइन दूर रहती है, कम पलटती है, लेकिन दिशा बदलने का पता देर से चलता है।
- ATR period: छोटा period हाल की volatility पर तेज़ी से react करता है; बड़ा period ज़्यादा smooth होता है।
कोई भी combination हर बाज़ार में अच्छा नहीं होता। Settings को पिछले data पर "fit" करना आसान है, लेकिन इससे भविष्य में वैसा ही नतीजा मिलने की कोई गारंटी नहीं।
Supertrend की सीमाएँ
- Sideways बाज़ार में whipsaw: जब price एक range में ऊपर-नीचे होता है, Supertrend बार-बार पलटता है। हर पलटाव पर trade करने वाले को लगातार छोटे नुकसान हो सकते हैं।
- Lag: यह ATR और पिछले closes पर बनता है, इसलिए trend बदलने के बाद ही पलटता है, पहले नहीं।
- Gap risk: अगर शेयर Supertrend लाइन से काफ़ी नीचे खुले, तो नुकसान लाइन की दूरी से ज़्यादा हो सकता है।
- Repaint की उलझन: चालू candle बंद होने से पहले लाइन का रंग बदल सकता है और फिर वापस आ सकता है। आम तौर पर candle बंद होने पर ही उसे final माना जाता है।
Supertrend को stop loss की तरह देखना
बहुत से traders Supertrend लाइन को trailing stop loss के reference की तरह देखते हैं, क्योंकि uptrend में यह सिर्फ़ ऊपर खिसकती है। ऊपर के उदाहरण में, अगर कोई ₹505 पर था और लाइन ₹486 पर है, तो प्रति शेयर risk ₹19 है। 100 शेयरों पर यह ₹1,900 हुआ। यह रकम आपकी पूँजी के हिसाब से ठीक है या नहीं, यह position sizing से तय करें, या position size calculator इस्तेमाल करें।
एक ज़रूरी सच भी जान लीजिए: SEBI की अपनी स्टडी (SEBI study, 2023 और 2025) के मुताबिक FY22 और FY25 में लगभग 10 में से 9 individual F&O traders को नुकसान हुआ। कोई भी indicator या formula इस जोखिम को ख़त्म नहीं करता। यह पेज सिर्फ़ सीखने के लिए है, किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है।
संक्षेप में
Supertrend = mid price ± (multiplier × ATR), और लाइन trend की दिशा के हिसाब से एक band पर रहती है। प्रचलित setting 10 और 3 है, पर यह सबसे अच्छी setting नहीं, बस default है। Trend वाले बाज़ार में यह साफ़ दिखता है, sideways बाज़ार में बार-बार पलटता है। इसे RSI जैसे दूसरे tools की तरह एक वर्णन मानें, भविष्यवाणी नहीं।
लोग क्या पूछते हैं
- Supertrend का फ़ॉर्मूला क्या है?
- Mid price = (High + Low) ÷ 2। Upper band = mid + multiplier × ATR, lower band = mid − multiplier × ATR। Uptrend में लाइन lower band पर और downtrend में upper band पर रहती है।
- Supertrend की best setting क्या है?
- कोई setting मुनाफ़े की गारंटी नहीं देती। 10 period ATR और 3 multiplier सिर्फ़ सबसे प्रचलित default है।
- Supertrend बार-बार रंग क्यों बदलता है?
- Sideways बाज़ार में price लाइन को बार-बार पार करता है, इसलिए दिशा पलटती रहती है। इसे whipsaw कहते हैं।
- Supertrend में ATR क्या है?
- ATR यानी Average True Range, पिछले कुछ candles में price की औसत हलचल। ATR बढ़ने पर Supertrend लाइन price से ज़्यादा दूर जाती है।