TradingMathsTradingMaths

होम › सीखें › लॉट साइज़ क्या है?

लॉट साइज़ क्या है?

अपडेट 13 अक्टूबर 2026

पोज़ीशन साइज़ कैलकुलेटर →

Cash market में आप चाहें तो सिर्फ़ एक शेयर भी खरीद सकते हैं। Futures और options में ऐसा नहीं होता। यहाँ हर contract में underlying (जिस शेयर या index पर contract बना है) की एक तय मात्रा होती है, जिसे lot size (लॉट साइज़) या market lot कहते हैं। आप एक lot, दो lot या दस lot का सौदा कर सकते हैं, लेकिन आधा lot कभी नहीं।

Lot size कौन तय करता है

हर contract का lot size exchange तय करता है, SEBI के बनाए ढाँचे के अंदर। हर index derivative (NIFTY, BANKNIFTY और दूसरे) और हर stock derivative का अपना अलग lot होता है। मौजूदा lot sizes NSE अपनी website और circulars में छापता है। ये समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए order लगाने से पहले हमेशा NSE की website या अपने trading app में ताज़ा list देख लें। यह पेज जान-बूझकर आज के numbers नहीं लिखता, क्योंकि वे जल्दी पुराने पड़ जाते हैं।

Contract value

असल में सबसे अहम number lot size नहीं, बल्कि contract value है:

Contract value = underlying का भाव × lot size

एक lot लेकर आप इतनी रकम का पूरा exposure लेते हैं, भले ही जमा सिर्फ़ उसका margin करते हों।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए एक index 10,000 पर है और उसका lot size 200 है (दोनों काल्पनिक)।

अब एक काल्पनिक stock future लें: Stock ABC ₹2,500 पर, lot size 300।

मान लीजिए इस stock future का margin contract value का 20% हो। तब आपके ₹1,50,000 block होंगे। अब 1% की चाल का मतलब है block हुए पैसे पर 5% का मुनाफ़ा या नुकसान, और 5% की चाल ₹37,500 की होगी, यानी आपके margin का एक-चौथाई। इसी तरह एक छोटी-सी दिखने वाली चाल आपके खाते में बड़ा उतार-चढ़ाव बन जाती है।

Lot इतना बड़ा क्यों होता है: minimum contract value

Lot size इस तरह रखे जाते हैं कि हर contract इतना बड़ा हो कि उसका कोई मतलब बने, और बहुत छोटी, सट्टे जैसी भागीदारी को बढ़ावा न मिले। Derivatives के लिए SEBI एक minimum contract value तय करता है। 2024 के आख़िर में individual traders का risk घटाने के उपायों के तहत SEBI ने index derivatives की minimum contract value बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी; यह सीमा नया contract शुरू होते समय की value पर लागू होती है। फिर lot इस तरह तय किए जाते हैं कि contract value इस minimum से ऊपर रहे।

Lot size क्यों बदलता है

भाव बदलते रहते हैं, लेकिन lot size कुछ समय तक वही रहता है। अगर underlying बहुत ऊपर चला जाए, तो उसी lot की contract value minimum से काफ़ी ऊपर निकल जाती है। अगर भाव गिरे, तो contract value minimum से नीचे भी जा सकती है। इसे दायरे में रखने के लिए NSE समय-समय पर lot sizes की समीक्षा करता है और बदलाव circulars से बताता है। आम तौर पर भाव बढ़ने पर lot छोटा होता है, और भाव गिरने पर बड़ा।

NSE का circular साफ़ बताता है कि नया lot किन expiries पर लागू होगा। आम तौर पर पहले से चल रहे contracts पुराने lot पर ही रहते हैं और नई expiries में नया lot आता है, इसलिए कुछ समय तक एक ही underlying के दो अलग lot sizes दिख सकते हैं। अगर आप position को एक महीने से अगले महीने में roll करते हैं, तो देख लें कि आपकी quantity अब भी ठीक बैठती है।

Lot size का आपके risk पर असर

Freeze quantity

एक order में ज़्यादा से ज़्यादा कितनी quantity हो सकती है, इसकी भी एक सीमा होती है, जिसे freeze quantity कहते हैं। इसे exchange तय करता है। इससे बड़ा order reject हो जाता है और उसे कई हिस्सों में बाँटना पड़ता है। यह lot size से अलग चीज़ है, और इसे भी NSE ही छापता है।

जोखिम की याद

बड़ी contract value का मतलब है कि नुकसान तेज़ी से बढ़ सकता है। SEBI की स्टडी (2023 और 2025) में पाया गया कि जिन सालों को देखा गया, उनमें लगभग 10 में से 9 individual F&O traders को नुकसान हुआ (SEBI)। कोई भी derivative trade करने से पहले contract value निकालें, और देखें कि एक आम दिन की चाल एक lot पर आपको कितने की पड़ेगी।

लोग क्या पूछते हैं

क्या F&O में एक lot से कम खरीद सकते हैं?
नहीं। Futures और options सिर्फ़ पूरे lots में trade होते हैं। इससे छोटी position लेनी हो, तो cash market या कोई दूसरा instrument इस्तेमाल करना होगा।
आज का lot size कहाँ देखें?
NSE इन्हें अपनी website और circulars में छापता है, और आपका trading app भी हर contract का lot size दिखाता है।
मेरे contract का lot size क्यों बदल गया?
Exchanges समय-समय पर lot sizes बदलते हैं, ताकि contract value SEBI के तय दायरे में रहे। आम तौर पर इसकी वजह underlying के भाव में बदलाव होती है।
Contract value कैसे निकालते हैं?
Underlying के भाव को lot size से गुणा करें। Futures का भाव ₹2,500 और lot 300 हो, तो contract value ₹7,50,000 है।
Freeze quantity क्या है?
एक order में ज़्यादा से ज़्यादा कितनी quantity हो सकती है, यह सीमा freeze quantity है, जिसे exchange तय करता है। इससे बड़ा order reject होता है और उसे हिस्सों में बाँटना पड़ता है।

स्रोत

ये भी पढ़ें