Intraday और delivery trading में फ़र्क
अपडेट 13 अक्टूबर 2026
भारत में शेयर ख़रीदते समय आपका trading app आपसे एक product type चुनने को कहता है। यही चुनाव तय करता है कि trade उसी दिन बंद करना होगा या नहीं, कितना पैसा block होगा, और मुनाफ़े पर टैक्स कैसे लगेगा। Trading के दो बड़े तरीके हैं: intraday trading और delivery trading।
Product codes
- MIS (Margin Intraday Square-off): equity या F&O में intraday trades के लिए। Position उसी दिन बंद करनी होती है। आप बंद न करें, तो ब्रोकर ख़ुद बंद कर देता है।
- CNC (Cash and Carry): cash market में delivery के लिए। आप पूरी value चुकाते हैं और शेयर आपके demat account में आ जाते हैं। इन्हें आप जब तक चाहें रख सकते हैं।
- NRML (Normal): futures और options की positions को रात भर, expiry तक, पूरे F&O margin के साथ रखने के लिए।
अलग-अलग platforms पर नाम थोड़े बदल सकते हैं, लेकिन आम तौर पर यही तीन labels होते हैं।
Auto square-off
NSE पर शेयरों में सामान्य trading सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक होती है, जबकि futures और options में दोपहर 3:40 बजे तक (आज का समय और छुट्टियाँ देखें)। ब्रोकर बाज़ार बंद होने से कुछ समय पहले खुली MIS positions अपने-आप बंद कर देते हैं, आम तौर पर आख़िरी 10 से 20 मिनट में। सही समय ब्रोकर और segment के हिसाब से अलग होता है, और कई ब्रोकर auto square-off की फ़ीस भी लेते हैं। अंदाज़ा न लगाएँ, अपने ब्रोकर की timings देखें।
Leverage और SEBI के peak margin नियम
Intraday trade में delivery से कम पैसा पहले लगाना पड़ता है, लेकिन इसकी सीमा SEBI का margin framework तय करता है, ब्रोकर की दरियादिली नहीं। Peak margin नियम चरणों में लागू हुए (पूरी तरह सितंबर 2021 से)। तब से ब्रोकरों को ज़रूरी margin, आम तौर पर VaR और extreme loss margin, दिन भर हर समय लेना होता है, intraday के peak पर भी। Equity cash trades में यह trade value का कम से कम 20% बनता है, इसलिए शेयरों में intraday leverage लगभग 5 गुना तक सीमित है, और ज़्यादा volatile शेयरों में इससे कम।
उदाहरण से समझें
आप Stock ABC के 100 शेयर ₹500 पर ख़रीदते हैं। Trade value = 100 × ₹500 = ₹50,000। मान लीजिए इस शेयर पर exchange का margin 20% है।
| Intraday (MIS) | Delivery (CNC) | |
|---|---|---|
| Block हुआ पैसा | ₹50,000 × 20% = ₹10,000 | ₹50,000 |
| भाव ₹5 आपके ख़िलाफ़ जाए | नुकसान ₹500 | नुकसान ₹500 |
| Block हुए पैसे पर नुकसान का % | ₹500 ÷ ₹10,000 = 5% | ₹500 ÷ ₹50,000 = 1% |
रुपयों में नुकसान दोनों में बराबर है। Leverage सिर्फ़ यह बदलता है कि आपके लगाए पैसे के मुकाबले वह कितना बड़ा है। इसीलिए leverage दोधारी तलवार है: ₹50,000 से आप ऐसी पाँच intraday positions ले सकते हैं, और सब पर ₹5 की उल्टी चाल ₹2,500 का नुकसान करेगी, यानी एक ही चाल में आपके पैसे का 5%।
T+1 settlement
भारत ने equity में T+1 settlement चरणों में अपनाया, जो जनवरी 2023 में पूरा हुआ। किसी trading day (T) पर ख़रीदे गए शेयर अगले trading day (T+1) को आपके demat account में आते हैं। Holdings बेचें, तो पैसे का settlement भी T+1 को होता है। Intraday trades में ख़रीद और बिक्री उसी दिन एक-दूसरे को बराबर कर देती हैं, इसलिए कुछ भी deliver नहीं होता।
एक बारीकी: CNC पर ख़रीदे शेयर अगले दिन, पूरा settlement होने से पहले ही, आपकी holdings में दिख सकते हैं। ब्रोकर इन्हें "T1" holdings के रूप में दिखाते हैं। Settlement से पहले इन्हें बेचने में थोड़ा जोखिम है, अगर सामने वाला seller शेयर deliver न कर पाए।
Charges भी अलग हैं
Securities Transaction Tax (STT), स्टाम्प ड्यूटी और कुछ ब्रोकरेज plans intraday और delivery में अलग होते हैं। Intraday में हर trade पर STT कम है, लेकिन intraday करने वाले आम तौर पर कहीं ज़्यादा trades करते हैं, इसलिए कुल ख़र्च जल्दी बढ़ जाता है। अपना ख़र्च ब्रोकरेज कैलकुलेटर से निकालें, और हर लाइन समझने के लिए ट्रेडिंग चार्ज क्या हैं पढ़ें।
टैक्स, संक्षेप में
भारत के income tax नियमों में दोनों तरीकों पर टैक्स अलग-अलग तरह से लगता है:
- Intraday equity का मुनाफ़ा या नुकसान speculative business income माना जाता है। Speculative घाटा आम तौर पर सिर्फ़ speculative मुनाफ़े से ही set off हो सकता है।
- Delivery trades पर capital gains के रूप में टैक्स लगता है: 12 महीने या उससे कम रखे शेयरों पर short-term, उससे ज़्यादा रखे शेयरों पर long-term, दोनों की अपनी-अपनी दर।
F&O के नियम इनसे भी अलग हैं। नियम हर Budget के साथ बदलते रहते हैं, इसलिए विस्तार के लिए F&O टैक्स गाइड पढ़ें और अपने मामले के लिए किसी टैक्स जानकार से पूछें।
किसके लिए कौन-सा?
आम तौर पर कोई एक तरीका बेहतर नहीं है। Delivery में आपको समय मिलता है और ज़बरदस्ती exit नहीं होता, लेकिन ज़्यादा पैसा लगा रहता है। Intraday में हर शाम पूँजी फिर ख़ाली हो जाती है, लेकिन trade को चलने के लिए सिर्फ़ कुछ घंटे मिलते हैं, leverage का जोखिम जुड़ता है, और आम तौर पर ज़्यादा trades और ज़्यादा ख़र्च होते हैं। आप जो भी चुनें, पहले stop-loss से अपना नुकसान तय करें और उसी से trade का size निकालें।
जोखिम याद रखें
SEBI की अपनी रिसर्च में बार-बार पाया गया है कि ज़्यादातर individual intraday और F&O traders पैसा गँवाते हैं। उसकी स्टडी (2023 और 2025) के मुताबिक, जिन सालों को देखा गया, उनमें लगभग 10 में से 9 individual F&O traders को नुकसान हुआ (SEBI)। Leverage ऐसे नुकसान को और जल्दी ले आता है।
लोग क्या पूछते हैं
- MIS trade बंद करना भूल जाएँ तो क्या होगा?
- आपका ब्रोकर दिन ख़त्म होने से कुछ पहले उसे उस समय के market price पर अपने-आप बंद कर देगा, और इसके लिए फ़ीस भी ले सकता है।
- क्या intraday trade को delivery में बदल सकते हैं?
- ज़्यादातर platforms square-off के समय से पहले MIS को CNC में बदलने देते हैं, बशर्ते आपके खाते में पूरी value चुकाने लायक पैसा हो।
- Intraday में कितना leverage मिलता है?
- SEBI के margin नियमों में equity cash trades पर कम से कम लगभग 20% margin चाहिए, इसलिए leverage लगभग 5 गुना तक सीमित है, और ज़्यादा जोखिम वाले शेयरों में इससे कम।
- ख़रीदे हुए शेयर demat account में कब आते हैं?
- T+1 settlement में किसी trading day पर ख़रीदे गए शेयर अगले trading day को demat account में आ जाते हैं।
- Intraday बेहतर है या delivery?
- आम तौर पर कोई एक तरीका बेहतर नहीं है। Delivery में समय मिलता है पर ज़्यादा पैसा लगता है; intraday में कम पैसा block होता है, पर leverage का जोखिम और ज़्यादा trades का ख़र्च जुड़ता है।