F&O और intraday ट्रेडिंग पर टैक्स कैसे लगता है
अपडेट 13 अक्टूबर 2026
F&O और intraday टैक्स कैलकुलेटर →
F&O, intraday और delivery trades पर टैक्स अलग-अलग नियमों से लगता है: दरें, घाटे के नियम और रिटर्न के form, सब अलग हैं। यह गाइड resident individuals (निवासी व्यक्तियों) के लिए है, 11 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए नियमों पर आधारित है, और सिर्फ़ आम जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। अपने आँकड़ों का अनुमान F&O टैक्स कैलकुलेटर से लगाएँ।
Trading की कमाई के तीन प्रकार
- Futures और options (F&O): non-speculative business income। Net मुनाफ़ा आपकी बाक़ी आय में जुड़ता है और उस पर slab rate से टैक्स लगता है।
- Intraday equity: speculative business income, क्योंकि शेयर उसी दिन बिना delivery के ख़रीदे और बेचे जाते हैं। इस पर भी slab rate से टैक्स लगता है, लेकिन इसका घाटा सिर्फ़ speculative कमाई से घटता है (नीचे देखें)।
- Delivery: आम तौर पर capital gains। Short-term gains (STCG) पर 20% और long-term gains (LTCG) पर साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के gain पर 12.5% टैक्स लगता है; ये दरें 23 जुलाई 2024 से लागू हैं। कौन-सा लगेगा, यह शेयर रखने की अवधि पर निर्भर है; देखें intraday बनाम delivery।
Slab rates और ₹12 लाख वाला rebate
नई टैक्स व्यवस्था (new tax regime) में FY 2025-26 और 2026-27 के slabs एक जैसे हैं; Budget 2026 ने इन्हें नहीं बदला। हर दर आय के सिर्फ़ उस हिस्से पर लगती है जो उस slab में आता है।
| कुल आय | दर |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | शून्य |
| ₹4 लाख से ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 लाख से ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 लाख से ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 लाख से ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
टैक्स पर 4% cess जुड़ता है, और ऊँची आय पर surcharge लगता है (₹50 लाख से ऊपर 10%, ₹1 करोड़ से ऊपर 15% और ₹2 करोड़ से ऊपर 25%)। कुल आय ₹12 लाख तक हो, तो ₹60,000 तक का rebate slab टैक्स ख़त्म कर देता है, और ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर marginal relief टैक्स के अचानक उछाल को नरम करता है। ₹75,000 का standard deduction सिर्फ़ salary के लिए है, trading की कमाई के लिए नहीं।
AY 2026-27 से rebate शेयरों पर STCG और LTCG जैसे special-rate gains का टैक्स कम नहीं कर सकता। दो traders लीजिए, दोनों की कुल आय ₹10 लाख है:
- Trader A का F&O मुनाफ़ा ₹10 लाख है। Slab टैक्स = 5% × ₹4 लाख + 10% × ₹2 लाख = ₹40,000। Rebate पूरा टैक्स ढक लेता है, इसलिए टैक्स शून्य।
- Trader B का F&O मुनाफ़ा ₹8 लाख है और STCG ₹2 लाख। ₹8 लाख पर slab टैक्स ₹20,000 है, जिसे rebate ढक लेता है। STCG का टैक्स 20% × ₹2 लाख = ₹40,000 बना रहता है, ऊपर से 4% cess ₹1,600: कुल ₹41,600।
Turnover: ICAI का तरीका
Tax audit की ज़रूरत turnover से तय होती है, और trading में turnover आपके trades की value नहीं है। ICAI की Guidance Note on Tax Audit (2022) के मुताबिक futures, options और intraday trades का turnover हर trade के मुनाफ़े या घाटे का absolute जोड़ है: हर मुनाफ़ा और हर घाटा plus मानकर जोड़ें।
| Trade | नतीजा | Turnover में जुड़ता है |
|---|---|---|
| 1. Futures, ख़रीदकर बेचा | मुनाफ़ा ₹6,000 | ₹6,000 |
| 2. Option, ख़रीदकर बेचा | घाटा ₹4,500 | ₹4,500 |
| 3. Option, बेचकर वापस ख़रीदा | मुनाफ़ा ₹2,500 | ₹2,500 |
| 4. Futures, बेचकर वापस ख़रीदा | घाटा ₹9,000 | ₹9,000 |
| कुल | Net घाटा ₹5,000 | ₹22,000 |
साल का नतीजा: ₹5,000 का net घाटा और ₹22,000 का turnover। Trade 1 शायद ₹10,00,000 का futures contract रहा हो, फिर भी उसका सिर्फ़ ₹6,000 का मुनाफ़ा गिना जाता है।
Tax audit कब ज़रूरी है
Business turnover ₹1 करोड़ से ऊपर हो, तो tax audit (धारा 44AB, अब धारा 63) ज़रूरी है। अगर नक़द में मिली और नक़द में दी गई रकम, दोनों अपने-अपने कुल के 5% के अंदर हों, तो यह सीमा ₹10 करोड़ हो जाती है। ब्रोकर के ज़रिए trade करने और पैसा सिर्फ़ बैंक से लेने-देने पर यह शर्त पूरी होती है।
एक दूसरी, कम दिखने वाली शर्त भी है। Audit तब भी लग सकता है जब मुनाफ़ा turnover के 6% से कम हो (घाटा भी गिना जाता है) और आपकी आय basic exemption limit से ऊपर हो। यह आप पर लागू होगा या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि आपने पिछले सालों में presumptive taxation (धारा 44AD, अब धारा 58) लिया था या नहीं। कुछ जानकारों का कहना है कि नई धारा 63 इस नियम का दायरा बढ़ा सकती है। यह अभी पक्का नहीं है, इसलिए अपने मामले के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से राय लें।
घाटा: set off और carry forward
ज़्यादातर traders के लिए यही हिस्सा सबसे अहम है: SEBI की स्टडी (2023 और 2025) में पाया गया कि जिन सालों को देखा गया, उनमें लगभग 10 में से 9 individual F&O traders को नुकसान हुआ (SEBI)।
- F&O का घाटा: उसी साल salary को छोड़कर किसी भी दूसरी आय से set off करें। जो बचे, उसे 8 साल तक carry forward कर सकते हैं, पर तब वह सिर्फ़ business income से घटेगा।
- Intraday (speculative) घाटा: सिर्फ़ speculative income से set off होता है, उसी साल या अगले 4 साल में।
- समय पर रिटर्न भरें: घाटा तभी carry forward होता है जब रिटर्न due date तक भरा गया हो।
कौन-से ख़र्च क्लेम कर सकते हैं
F&O और intraday का मुनाफ़ा business income है, इसलिए trading का काम चलाने में हुआ ख़र्च आप घटा सकते हैं:
- ब्रोकरेज और contract notes के बाक़ी चार्ज (देखें ट्रेडिंग चार्ज क्या हैं)। कमाई business income हो, तो STT भी business ख़र्च के रूप में घटता है, लेकिन capital gains में नहीं।
- इंटरनेट का बिल, और फ़ोन बिल का business वाला हिस्सा।
- Trading में इस्तेमाल होने वाले computer पर depreciation।
बिल और हर ख़र्च का सीधा रिकॉर्ड रखें, और निजी काम में भी आने वाली चीज़ का सिर्फ़ business वाला हिस्सा क्लेम करें।
Advance tax
Trading के मुनाफ़े से TDS नहीं कटता, इसलिए अगर साल का टैक्स बहुत कम न हो, तो उसे साल के दौरान ही advance tax के रूप में भरना होता है: जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च की किस्तों में। हर किस्त तक साल के टैक्स का बढ़ता हिस्सा भरना होता है, और कम या देर से भरने पर ब्याज लगता है। Trading का मुनाफ़ा ऊपर-नीचे होता है, इसलिए हर due date से पहले अब तक का मुनाफ़ा जोड़ लें।
ITR-3 और AY 2026-27 की तारीख़ें
F&O या intraday की कमाई हो, तो ITR-3 भरें, चाहे सिर्फ़ घाटा ही हुआ हो। Salary और capital gains इसी रिटर्न में आते हैं। FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए:
- बिना audit वाले रिटर्न: due date 31 अगस्त 2026। यह तारीख़ हमें सिर्फ़ secondary sources में मिली, किसी आधिकारिक notice में नहीं। तारीख़ निकल गई हो, तो late return शायद अब भी भरा जा सके, लेकिन उस साल का business घाटा carry forward नहीं होगा।
- Audit वाले मामले: CBDT के 28 सितंबर 2026 के extension के बाद audit report की आख़िरी तारीख़ 21 अक्टूबर 2026 है और रिटर्न की 21 नवंबर 2026।
रिटर्न भरने से पहले तारीख़ें income tax e-filing portal पर पक्की कर लें।
Income-tax Act 2025
1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act 2025 ने 1961 के Act की जगह ले ली है। दरें वही हैं, पर धाराओं के नंबर बदल गए हैं, इसलिए कुछ समय तक दोनों दिखेंगे:
| नियम | 1961 Act | 2025 Act |
|---|---|---|
| Tax audit | 44AB | 63 |
| Presumptive taxation | 44AD | 58 |
| Rebate | 87A | 156 |
| Equity शेयरों पर STCG | 111A | 196 |
| Equity शेयरों पर LTCG | 112A | 198 |
| Business घाटे का carry forward | 72 | 112 |
| Speculation घाटा | 73 | 113 |
चार्टर्ड अकाउंटेंट से कब मिलें
CA से तब बात करें जब:
- Turnover ₹1 करोड़ या ₹10 करोड़ के आसपास हो, या मुनाफ़ा turnover के 6% से कम हो (घाटा भी);
- आपने किसी पिछले साल presumptive taxation लिया हो;
- घाटा carry forward करना हो, या पिछले साल का घाटा set off करना हो;
- एक ही साल में salary, F&O, intraday और capital gains, सब हों;
- आप delivery शेयर इतनी बार ख़रीदते-बेचते हों कि इसे business माना जा सके;
- आपको पक्का न पता हो कि कितना advance tax भरना है;
- आयकर विभाग से कोई notice आया हो।
इस पेज पर जो बातें अभी पक्की नहीं हैं, उनके बारे में भी पूछें, ख़ासकर नई धारा 63 में कम मुनाफ़े वाले audit नियम के बारे में।
लोग क्या पूछते हैं
- क्या F&O की कमाई speculative होती है?
- नहीं। F&O trading non-speculative business income है, जिस पर आपके slab rate से टैक्स लगता है। Intraday equity trading speculative business income है।
- F&O turnover कैसे निकालते हैं?
- ICAI की Guidance Note के मुताबिक हर trade का मुनाफ़ा या घाटा plus मानकर जोड़ें। यह आपके ख़रीदे-बेचे contracts की value नहीं है।
- क्या F&O का घाटा salary से set off हो सकता है?
- नहीं। F&O का घाटा उसी साल salary को छोड़कर बाक़ी आय से set off हो सकता है, और बचा घाटा 8 साल तक business income से घटाने के लिए carry forward होता है, अगर आप समय पर रिटर्न भरें।
- घाटा हुआ हो, तो क्या tax audit ज़रूरी है?
- यह निर्भर करता है। मुनाफ़ा turnover के 6% से कम हो और आय basic exemption limit से ऊपर हो, तो audit लग सकता है, इस पर निर्भर कि आपने पहले presumptive taxation लिया था या नहीं। नए Act ने इसे बदला हो सकता है, इसलिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछें।
- Traders कौन-सा ITR form भरते हैं?
- F&O या intraday की कमाई हो तो ITR-3, घाटा होने पर भी। Salary और capital gains इसी रिटर्न में आते हैं।