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IPO लॉट साइज़ और आवेदन रकम कैलकुलेटर

प्राइस बैंड का ऊपरी भाव और लॉट साइज़ डालें। देखें कि एक लॉट कितने का है और हर कैटेगरी में कितने लॉट आते हैं, एक रिटेल लॉट से सबसे छोटे big NII आवेदन तक।

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कैसे इस्तेमाल करें

  1. प्राइस बैंड का ऊपरी भाव (cap price) डालें। Cut-off प्राइस पर रिटेल बोली इसी भाव पर पैसा ब्लॉक करती है, इसलिए आवेदन की रकम यही है।
  2. लॉट साइज़ डालें: एक लॉट में कितने शेयर हैं, जो ऑफ़र डॉक्यूमेंट और प्राइस बैंड की घोषणा में लिखा होता है। बोली पूरे लॉट में लगती है।
  3. आप जितने लॉट माँगना चाहते हैं, वे डालें, ताकि रकम और कैटेगरी दिखे।

कैटेगरी

IPO अपने शेयर निवेशकों की कैटेगरी में बाँटता है, और आवेदन का साइज़ तय करता है कि वह किस कैटेगरी में है।

कैटेगरीआवेदन का साइज़आम इश्यू में हिस्सा
रिटेल व्यक्तिगत निवेशक (RII)₹2 लाख तककम से कम 35%
Small non-institutional निवेशक (sNII)₹2 लाख से ऊपर, ₹10 लाख तकNII हिस्से का एक-तिहाई
Big non-institutional निवेशक (bNII)₹10 लाख से ऊपरNII हिस्से का दो-तिहाई
Qualified institutional buyers (QIB)सिर्फ़ संस्थाएँ50% तक

टेबल के हिस्से ज़्यादातर mainboard इश्यू के हैं, जो non-institutional निवेशकों के लिए कम से कम 15% रखते हैं। जो कंपनी SEBI की मुनाफ़े वाली शर्त पूरी नहीं करती, वह कम से कम 75% संस्थाओं के लिए रखती है, और तब रिटेल को 10% तक मिलता है। हर इश्यू का बँटवारा उसके ऑफ़र डॉक्यूमेंट में होता है।

उदाहरण से समझें

Company ABC का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 है, और एक लॉट 50 शेयर का है। एक लॉट = 50 × ₹300 = ₹15,000।

UPI से ₹5 लाख तक ब्लॉक हो सकते हैं, जो यहाँ 33 लॉट (₹4,95,000) है। इससे बड़ा आवेदन नेट बैंकिंग ASBA से होता है, जिसमें बैंक सीधे पैसा ब्लॉक करता है।

ऊपरी भाव ही क्यों

रिटेल निवेशक cut-off प्राइस पर बोली लगा सकता है, यानी बैंड के अंदर जो भी इश्यू प्राइस तय हो, उसे चुकाने की हामी। बैंक बैंड के ऊपरी भाव पर पैसा ब्लॉक करता है, और इश्यू प्राइस कम तय हो, तो फ़र्क़ की रकम अलॉटमेंट के बाद अनब्लॉक हो जाती है। NII और QIB cut-off पर बोली नहीं लगा सकते: वे प्राइस लिखते हैं, और बोली लगाने के बाद उसे न वापस ले सकते हैं, न घटा सकते हैं।

लॉट और अलॉटमेंट की संभावना

Oversubscribed इश्यू में रिटेल के सबसे ज़्यादा लॉट माँगने से शेयर मिलने की संभावना नहीं बढ़ती: हर जीतने वाले रिटेल आवेदन को एक लॉट मिलता है, लॉटरी से। यह संभावना IPO अलॉटमेंट चांस कैलकुलेटर निकालता है। जितने लॉट माँगे, सबका पैसा अलॉटमेंट तक ब्लॉक रहता है, आम तौर पर इश्यू बंद होने के दो कामकाजी दिन बाद तक।

यह कैलकुलेटर क्या नहीं गिनता

कुछ इश्यू अपने कर्मचारियों या लिस्टेड पैरेंट कंपनी के शेयरधारकों के लिए हिस्सा रखते हैं, और कुछ रिटेल या कर्मचारियों को प्रति शेयर छूट देते हैं; ऑफ़र डॉक्यूमेंट में यह लिखा होता है। SME IPO, जो BSE और NSE के SME प्लेटफ़ॉर्म पर लिस्ट होते हैं, उनके न्यूनतम आवेदन अलग और बड़े होते हैं। यह कैलकुलेटर mainboard इश्यू के नियमों पर चलता है।

लोग क्या पूछते हैं

IPO में रिटेल निवेशक ज़्यादा से ज़्यादा कितने का आवेदन कर सकता है?
एक आवेदन में ₹2 लाख तक। कैलकुलेटर इसमें आने वाले सबसे ज़्यादा पूरे लॉट निकालता है: ₹15,000 के लॉट पर 13 लॉट, यानी ₹1,95,000।
sNII और bNII में क्या फ़र्क़ है?
दोनों ₹2 लाख से ऊपर के non-institutional आवेदन हैं। Small NII (sNII) ₹10 लाख तक है और NII हिस्से का एक-तिहाई पाता है; big NII (bNII) ₹10 लाख से ऊपर है और दो-तिहाई पाता है। दोनों में लॉटरी जीतने वाले को NII का एक ही न्यूनतम आवेदन मिलता है, यानी ₹2 लाख से ज़्यादा कीमत वाले सबसे कम लॉट।
रकम प्राइस बैंड के ऊपरी भाव से क्यों निकलती है?
Cut-off प्राइस पर रिटेल बोली बैंड के ऊपरी भाव पर पैसा ब्लॉक करती है। इश्यू प्राइस कम तय हो, तो अतिरिक्त रकम अलॉटमेंट के बाद अनब्लॉक हो जाती है।
क्या UPI से ₹5 लाख से ज़्यादा का आवेदन हो सकता है?
नहीं। IPO में UPI से ₹5 लाख तक के आवेदन होते हैं। इससे ज़्यादा के लिए अपने बैंक के नेट बैंकिंग ASBA से आवेदन करें।

स्रोत

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